क्या मुरादाबाद से चुनाव लड़ सकते हैं दानिश अली? मायावती को शुभकामनाएं देकर खूब हुए ट्रोल; बसपा से हैं निलंबित

मायावती के साथ फोटो डालकर शुभकामना संदेश पर सांसद को लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया है।

क्या मुरादाबाद से चुनाव लड़ सकते हैं दानिश अली? मायावती को शुभकामनाएं देकर खूब हुए ट्रोल; बसपा से हैं निलंबित

मायावती के साथ फोटो डालकर शुभकामना संदेश पर सांसद को लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया है। दरअसल बसपा प्रमुख ने दानिश अली से दूरी बना ली थी। इससे माना जा रहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में दानिश अली कांग्रेस से आइएनडीआइए के प्रत्याशी होंगे। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि वह अमरोहा के बजाय मुरादाबाद सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

 पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित सांसद कुंवर दानिश अली ने बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ अपना फोटो एक्स पर डालते हुए शुभकामनाएं दी हैं। एक दिन पूर्व ही उन्होंने राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने का एलान किया था।
मायावती के साथ फोटो डालकर शुभकामना संदेश पर सांसद को लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया है। उधर, सांसद ने कहा कि वह आदर्श की राजनीति करते हैं। उन्हें ऐसे समर्थक वर्ग की जरूरत नहीं है जोकि आदर्शों से दूर है।

संसद में दिल्ली के सांसद विधूड़ी की ओर से विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद से बसपा सांसद सुर्खियों में हैं। टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने आवास पर जाकर दानिश अली को ढांढस बंधाया गया था। दानिश ने राहुल गांधी व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के साथ अपने फोटो प्रसारित भी किए थे।

मायावती ने दानिश अली से बना ली थी दूरी
वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने दानिश अली से दूरी बना ली थी। इससे माना जा रहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में दानिश अली कांग्रेस से आइएनडीआइए के प्रत्याशी होंगे। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि वह अमरोहा के बजाय मुरादाबाद सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस बात को और बल तब मिल गया जब रविवार को दानिश अली ने वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होंगे।

हालांकि इस संबंध में दानिश ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सोमवार को उन्होंने अपने एक्स पर बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ अपना पुराना फोटो डालते हुए उन्हें न सिर्फ जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं बल्कि, सामाजिक परिवर्तन की महानायिका लिखा।

इस पर तमाम लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। किसी ने लिखा कि भाई कुछ तो खुद्दारी रखो तो किसी ने लिखा कि अब तो सुधर जाओ। उधर, दानिश अली ने कहा कि उन्होंने जिंदगी भर आदर्श की राजनीति की है। वह कहीं भी रहें अच्छे लोगों की प्रशंसा करते रहेंगे। सवाल किया, जन्मदिन जैसे अवसरों पर क्या उन्हें पार्टी सुप्रीमो को शुभकामनाएं नहीं देनी चाहिए। कहा कि उनके समर्थकों का अच्छा जनसमूह है, उन्हें घटिया मानसिकता वालों की जरूरत नहीं है।

राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने के लिए दानिश का वक्तव्य
दानिश अली ने राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने के लिए जो वक्तव्य जारी किया उसमें लिखा है- ये फैसला मेरे लिए एक अहम फैसला है। ये फैसला लेते समय मेरे सामने दो रास्ते थे। एक, कि मैं स्टेटस को चलने दूं, जो स्थितियां देश में हैं उन्हें वैसे ही स्वीकार लूं, जो अन्याय देश के दलित, शोषित, वंचित, अल्पसंख्यक और अन्य गरीब वर्ग के साथ हो रहा है, उसके खिलाफ कोई आवाज ना उठाऊं, और दूसरा रास्ता ये था की मैं समाज में बढ़ते अन्याय के खिलाफ संसद में आवाज उठाने के साथ-साथ आंदोलन करूं।

मेरे जमीर ने कहा कि मुझे दूसरा रास्ता लेना चाहिए। ये फैसला लेने का एक बड़ा कारण यह भी है कि मैं खुद इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था का भुगतभोगी हूं। संसद के अंदर मुझ पर जो आक्रमण हुआ वो सब ने देखा। सत्ताधारी दल ने मुझ पर आक्रमण करने वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि उसे पुरस्कृत किया। यही हाल पूरे देश का है। भय और आतंक का माहौल बनाने की कोशिश हो रही है।

जब मुझ पर संसद में आक्रमण हुआ, तब मुझे और मेरे परिवार को हौसला देने वाले राहुल गांधी जी देश के पहले नेता थे। वो उस घड़ी में मेरे साथ खड़े रहे। राहुल गांधी की ये यात्रा कमजोर को न्याय दिलाने की और भारतवासियों को जोड़ने की यात्रा है।

ये यात्रा देश की विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ संघर्ष है। राहुल ने पूरे देश को जोड़ने के लिए और हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए यह यात्रा शुरू की है। इस लिये मैं आज राहुल जी के साथ खड़ा हूं। मेरा मानना है कि इस यात्रा का जो उद्देश्य है, उसकी पूर्ति करना हम सभी लोगों का, जो कि राजनीति और समाज सेवा के काम से जुड़े हुए हैं, असली उद्देश्य है।