इतिहास में दफन हुआ अकबरनगर! बुलडोजर से गिराए मकान, जमींदोज हो गए 1200 अवैध निर्माण

नगर निगम की टीम ध्वस्त हुए मकानों और अन्य बिल्डिंगों के मलबे को हटाने का काम कर रही है. एलडीए का कहना है

इतिहास में दफन हुआ अकबरनगर! बुलडोजर से गिराए मकान, जमींदोज हो गए 1200 अवैध निर्माण

नगर निगम की टीम ध्वस्त हुए मकानों और अन्य बिल्डिंगों के मलबे को हटाने का काम कर रही है. एलडीए का कहना है कि जिन लोगों के मकान टूटे हैं उन्हें पीएम आवास योजना के तहत मकान दिए गए हैं. अकबरनगर कुकरैल नदी की जमीन पर अवैध रूप से बसाया गया था. शासन के निर्देश पर सर्वे के दौरान नदी की जमीन पर बड़ी संख्या में अवैध निर्माण की बात सामने आई थी. दिसंबर 2023 से यहां से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हुआ था.

लखनऊ का अकबरनगर अब इतिहास के पन्नों में दफन हो गया. कुकरैल नदी की जमीन पर अवैध रूप से बसी इस कॉलोनी को बुलडोजरों ने ध्वस्त कर दिया. कभी यहां पक्के मकान, सड़क और आबादी नजर आती थी आज यह जगह मलबे के ढेर में तब्दील हो गई है. चारों ओर टूटे मकान और दुकानों का मलबा नजर आ रहा है. करीब 24.5 एकड़ जमीन पर बने अवैध निर्माण को ढहा दिया गया 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अकबरनगर आजादी के वक्त में बसा था. जिस जमीन पर लोगों ने निर्माण कराया वह कुकरैल नदी की थी. यहां से कभी नदी की धरा बहती थी. प्रदेश सरकार ने इस जमीन पर शहर को सुंदर दिखाने के लिए रिवर फ्रंट बनाने का प्रस्ताव है. इसी को लेकर नदी की जमीन पर डेवलपमेंट अथॉरिटी, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से बसे अकबरनगर को पूरी तरह जमींदोज कर दिया.

जमींदोज हो गए 1200 अवैध निर्माण
ध्वस्तीकरण अभियान 10 जून से शुरू किया गया था. इसे रोकने के लिए यहां रहने वाले लोग हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए लेकिन निर्माण अवैध होने की वजह से उन्हें निराशा हाथ लगी. कोर्ट के आदेश के बाद यहां बुलडोजरों ने अपना कम करना शुरू किया. मंगलवार की रात तक यहां बने 1169 आवास और 101 कॉमर्शियल निर्माण को ध्वस्त कर जमीन को समतल करने का काम शुरू कर डाला.

24.5 एकड़ जमीन कराई गई खाली
अभियान में करीब 24.5 एकड़ जमीन पर बने 1200 से अधिक अवैध निर्माण जमींदोज किए गए हैं. भीकमपुर में 48 अवैध निर्माण तोड़े जाने के बाद अकबरनगर पार्ट वन और टू में अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किया गया था. इसके विरोध में अकबरनगर के लोग हाई कोर्ट चले गए। राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. हालांकि कोर्ट ने निर्माण अवैध मानते हुए एलडीए को कार्रवाई की अनुमति दे दी थी। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद एलडीए ने 10 जून को ध्वस्तीकरण शुरू किया गया था.